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सबसे कम ब्रोकरेज कौन लेता है?

सबसे कम ब्रोकरेज कौन लेता है?
फ्री स्क्रीन रिप्लेसमेंट भी
Airtel के इस ऑफर के तहत स्मार्टफोन खरीदने वाले ग्राहकों को अपने स्मार्टफोन का एक बार फ्री स्क्रीन रिप्लेसमेंट भी मिलता है। एयरटेल के ऑफर में स्मार्टफोन खरीदने वाले ग्राहकों को ₹12000 तक के स्मार्टफोन पर ₹4800 के अतिरिक्त बेनिफिट मिल सकते हैं। एक बार ग्राहक जैसे ही जरूरी रिचार्ज कराता है, स्क्रीन रिप्लेसमेंट के लिए एयरटेल थैंक्स एप पर 90 दिनों के अंदर उसका रजिस्ट्रेशन कर लिया जाता है।

भारत के शीर्ष 13 डिस्काउंट ब्रोकर्स / ट्रेडिंग प्लेटफ़ॉर्म

भारत के शीर्ष 13 डिस्काउंट ब्रोकर्स / ट्रेडिंग प्लेटफ़ॉर्म 1

यह जानना कि डिस्काउंट ब्रोकर क्या हैं सबसे कम ब्रोकरेज कौन लेता है? सबसे कम ब्रोकरेज कौन लेता है? और उनके द्वारा प्रदान किए जाने वाले लाभ आपको खाता खोलने के बारे में सूचित विकल्प बनाने में मदद कर सकते हैं। यहां भारत में डिस्काउंट ब्रोकरों की एक सूची है जो आपको आरंभ सबसे कम ब्रोकरेज कौन लेता है? करने में मदद करेगी!

डिस्काउंट ब्रोकर
डिस्काउंट ब्रोकर एक वित्तीय ब्रोकर है जो पारंपरिक पूर्ण-सेवा दलालों की तुलना में कम शुल्क लेता है। वे कम सेवाएं देकर ऐसा करते हैं। उदाहरण के लिए, एक पूर्ण-सेवा दलाल आम तौर पर निवेश और बीमा पॉलिसियों दोनों पर सलाह देगा, जबकि छूट दलाल केवल निवेश के लिए सलाह या उपकरण प्रदान कर सकता है। यह उन्हें उन सेवाओं के लिए कम शुल्क लेने की अनुमति देता है जो आप चाहते हैं और जिनकी आपको आवश्यकता है।

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एयरटेल

कैसे मिलेगा cashback?
भारती एयरटेल ने कहा है कि अगर कोई ग्राहक 249 या इससे अधिक रुपए का प्रीपेड प्लान लगातार 36 महीने तक रिचार्ज कराता है तो उसे ₹6000 कैशबैक का फायदा मिल सकता है। भारती एयरटेल के ग्राहकों को कैशबैक दो हिस्से में मिलेगा। इसमें पहले इंस्टॉलमेंट सबसे कम ब्रोकरेज कौन लेता है? के रूप में ₹2000 की रकम 18 महीने बाद मिलेगी, जबकि बाकी ₹4000 की रकम 36 महीने बाद मिलेगी।

36 महीने में स्मार्टफोन फ्री
एयरटेल ने कहा है कि कैशबैक ऑफर के तहत अगर कोई ग्राहक यह प्लान लेता है तो उसे ₹6000 के स्मार्टफोन की खरीदारी पर अगले 36 महीने में ₹6000 कैशबैक पाने का मौका मिलता है। यह ग्राहकों के लिए स्मार्टफोन चेंज करने का शानदार अवसर है। इस अवधि में कस्टमर डिजिटल तरीके से कनेक्टेड रहने के साथ ही स्मार्टफोन खरीदने में खर्च की गई अपनी पूरी रकम वापस पा सकता है।

जिस ट्रेडिंग कंपनी के जरिए शेयर बाजार में पैसा लगा रहे, वही बंद हो गई तो क्‍या होगा? जानिए आपका पैसा डूबेगा या बचा रहेगा

जिस ट्रेडिंग कंपनी के जरिए शेयर बाजार में पैसा लगा रहे, वही बंद हो गई तो क्‍या होगा? जानिए आपका पैसा डूबेगा या बचा रहेगा

अब आम आदमी भी शेयर बाजार में निवेश कर ज्‍यादा रिटर्न पाने में रुचि दिखा रहा है. यही कारण है कि बीते एक साल में रिकॉर्ड संख्‍या में डीमैट अकाउंट खोले गए हैं. पिछले महीने तक के आंकड़ों के अनुसार देशभर में करीब 6.9 करोड़ डीमैट अकांउट्स हैं. हालांकि, दूसरे देशों के मुकाबले आबादी के लिहाज से यह अनुपात अभी भी बहुत कम है. भारतीय शेयर बाजार में सबसे ज्‍यादा पैसा महाराष्‍ट्र, गुजरात और उत्‍तर प्रदेश के लोग लगाते हैं. लक्षद्वीप, अंडमान एवं निकोबार से लेकर मिज़ोरम तक के लोग शेयर बाजार से अच्‍छी कमाई कर रहे हैं.

ब्रोकरेज कंपनी बंद होने पर आपके निवेश का क्‍या होगा?

आप यह जानकार राहत की सांस ले सकते हैं कि स्‍टॉक ब्रोकिंग कंपनी के डिफॉल्‍ट करने या बंद होने के बाद भी आपकी पूंजी या फंड पूरी तरह से सुरक्षित रहेगा. ऐसा नहीं होगा कि सबसे कम ब्रोकरेज कौन लेता है? स्‍टॉक ब्रोकर आपकी पूंजी लेकर भाग जाए. उदाहरण के तौर पर देखें तो जब हर्षद मेहता स्‍कैम सामने आया था, तब उनकी ब्रोकिंग कंपनी ग्रो मोर रिसर्च एंड एसेट मैनेजमेंट को सेबी ने बैन कर दिया था. लेकिन इस कंपनी के जरिए शेयर बाजार में पैसा लगाने वाले लोगों को कोई नुकसान नहीं हुआ.

आपको सबसे पहले यह समझने की जरूरत कि ये स्‍टॉक ब्रोकिंग कंपनियां महज एक बिचौलिए के तौर पर काम करती हैं. आपके फंड पर इनकी पहुंच सीधे तौर पर नहीं होती है ताकि वे आपकी पूंजी पर अपना हम जमा सकें. लेकिन इनके पास पड़ी अपनी फंड या पूंजी को इस्‍तेमाल करने के लिए आप इन्‍हें निर्देश दे सकते हैं.

स्‍टॉक्‍स और शेयरों का क्‍या होगा?

आपका फंड डीमैट अकाउंट में जमा होता है. ये डीमैट अकाउंट डिपॉजिटरीज के पास खुलात है. सेबी ने दो डिपॉजिटरीज – नेशनल सिक्‍योरिटीज डिपॉजिटरीज लिमिटेड (NSDL) और सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज (इंडिया) लिमिटेड (CDSL) को मंजूरी दी है. भारत सरकार के वित्‍त मंत्रालय के प्रति सेबी की जवाबदेही होती है.

किसी भी समय पर एक निवेशक का स्‍टॉक या शेयर ब्रोकरेज फर्म्‍स के पास नहीं होता है. वे बस एक प्‍लेटफॉर्म के तौर पर काम करते हैं. इनका काम बस आपके निर्देश के हिसाब से आपकी जगह ट्रेड करना है. बदले में ये आपसे फीस वसूलते हैं.

इसी प्रकार आपका म्‍यूचुअल फंड इन्‍वेस्‍टमेंट एसेट मैनेजमेंट कंपनी (AMC) के पास होता है. ऐसे में अगर ब्रोकरेज फर्म बंद भी हो जाता है तो आपका म्‍यूचुअल फंड सुरक्षित रहेगा.

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अगर आप बीमार होते हैं या स्वास्थ्य संबंधी कोई समस्या होती है तो आप क्या करेंगे? इसका आसान उत्तर होगा कि आप डॉक्टर के पास जाकर बीमारी का दवा लेंगे। इसी तरह आयकर से जुड़े मामले के लिए आप बिना हिचक एक चार्टर्ड अकाउंटेंट से मदद लेंगे।

अगर आपकी कार खराब हो जाती है और कोई विशेष समस्या है तो आप किसी अच्छे मैकेनिक के पास जाएंगे। उपर्युक्त सभी मामलों में आप ऐसे पेशेवर विशेषज्ञों से सहायता लेना चाहते हैं, जो उस विषय को अच्छी तरह जानता है और आपको उपयुक्त समाधान देने में सक्षम है।

सीधे निवेश से होता है नुकसान

अनुभव में हमने देखा है कि जो खुदरा निवेशक शेयर बाजार में सीधे निवेश करते हैं नुकसान ही उठाते हैं। आमतौर पर वे अपने पोर्टफोलियो में बहुत अधिक शेयर खरीद लेते हैं। इस चक्कर में यदि उनको कमाई होती भी है, तो वह बाजार के औसत रिटर्न से कम होती है।

ऐसा कंपनी के विषय में सही समझ नहीं होने और शेयरों की अधिक मूल्य पर खरीददारी से होता है। निवेशकों को नुकसान उठाना पड़ता है। इसके चलते कई बार निवेश की हुई पूंजी का लौटना भी मुश्किल हो जाता है।

इसके अलावा शेयरों की जल्दी खरीदारी और बिक्री पर निवेशकों को कई अतिरिक्त शुल्क चुकाने होते हैं जैसे ब्रोकरेज शुल्क। इसके चलते कई दफा मिलने सबसे कम ब्रोकरेज कौन लेता है? वाले रिटर्न के मुकाबले शेयरों की खरीद-बिक्री पर लगने वाला शुल्क काफी ज्यादा हो जाता है।

शेयर ब्रोकर चुनने में इन पांच बातों का रखें ध्यान

शेयर ब्रोकर चुनने में इन पांच बातों का रखें ध्यान

1. डिस्काउंट ब्रोकर पर दांव!
डिस्काउंट ब्रोकर आपके आदेशानुसार सिर्फ शेयरों की खरीद फरोख्त करते हैं. फुल सर्विस ब्रोकर आपको निवेश आइडिया भी देते हैं. इसलिए यदि आप बाजार की उथल-पुथल और हलचल को समझते हैं, जो आप डिस्काउंट ब्रोकर का चुनाव कर सकते हैं. अन्यथा फुल सर्विस ब्रोकर ही बेहतर है.

2. फोन या ऑनलाइन कारोबार की सेवा
आप कारोबार के लिए फोन और इंटरनेट दोनों का ही इस्तेमाल कर सकते हैं. ब्रोकर का चयन करने से पहले यह जान लेना जरूरी है कि वह दोनों में से कौनसी सुविधा मुहैया करवाता है. हालांकि, हाइब्रिड ब्रोकर्स दोनों ही सुविधाएं देते हैं.

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